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RBI Repo Rate Hike: RBI MPC ने 44 महीने बाद ब्याज दर बढ़ाई, महंगाई अनुमान में किया इजाफा


आरबीआई एमपीसी ने करीब 44 महीनों के बाद रेपो रेट में इजाफा किया है. इस इजाफे के बाद आम लोगों की लोन ईएमआई में इजाफा होगा. आखिरी बार फरवरी 2023 में रेपो रेट में बढ़ोतरी हुई थी.

RBI Repo Rate Hike News: करीब 44 महीने के बाद देश का सेंट्रल बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया महंगाई से जंग और ज्यादा तीखी करता हुआ दिखाई दिया. यही वजह है कि आरबीआई एमपीसी ने फरवरी 2023 के बाद पहली बार रेपो रेट को बढ़ा दिया है. आरबीआई गवर्नर ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी का ऐलान किया है. इस फैसले के बाद देश में होम लोन और कार लोन के अलावा बाकी रिटेल लोन की ईएमआई महंगी हो जाएगी. आरबीआई की ओर से लगातार बढ़ रहे महंगाई के प्रेशर को देखते हुए यह फैसला लिया गया है.

इससे पहले आरबीआई ने लगातार चार बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया था. वहीं साल 2025 में फरवरी से लेकर दिसंबर तक रेपो रेट में 125 प्वाइंट्स की कमी की थी. मौजूदा साल में मिडिल ईस्ट में वॉर छिड़ जाने से कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा हुआ और महंगाई बढ़ी. मिडिल ईस्ट की वजह से सिर्फ कच्चे तेल की कीमतों में ही इजाफा देखने को न​हीं मिला. उसका असर बाकी चीजों पर भी दिखाई दिया.

नेचुरल गैस की सप्लाई, खाद और बाकी जरूरी सप्लाई का संकट भी खड़ा हुआ. जिसकी वजह से सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में परेशानी खड़ी हुई. वहीं दूसरी ओर अलनीनो की वजह से मानसून अनुमान से काफी कम रहने की वजह से खेती पर भी काफी असर पड़ा है. जिसकी वजह से प्रोडक्शन में असर देखा देखा गया, जो आगे भी रह सकता है. आरबीआई गवर्नर की ओर से संकेत मिला है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो दिसंबर की मीटिंग में भी रेपो रेट में इजाफा देखने को मिल सकता है.

रेपो रेट में इजाफा

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के बयान के अनुसार एमपीसी ने ब्याज दरों में इजाफे का ऐलान किया है. ये इजाफा 25 बेसिस प्वाइंट्स का देखने को मिला है. जिसके बार आरबीआई का रेपो रेट 5.25 फीसदी बढ़कर 5.50 फीसदी हो जाएगा. वैसे मौजूदा साल की पिछली 4 आरबीआई एमपीसी में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया था. उससे पहले फरवरी 2025 से लेकर दिसंबर 2025 के बीच आरबीआई ने रेपो रेट में 125 बेसिस प्वाइंट्स की कटौती की थी. जिसके बाद आरबीआई ने पॉज बटन दबा दिया था. वैसे बीती आरबीआई पॉलिसी मीट के बाद आरबीआई गवर्नर मिडिल ईस्ट वॉर और अलनीनो के असर को लेकर चेतावनी दे रहे थे. साथ ही महंगाई बढ़ने के भी संकेत दे रहे थे. पिछले महीने अमेरिकी फेड रिजर्व ने भी ब्याज दरों में इजाफा किया है.

क्या कह रहे हैं जानकार?

एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा, "2026 की तीसरी तिमाही में मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) और बेंगलुरु की कुल हिस्सेदारी सात प्रमुख शहरों में हुई आवासीय बिक्री में 48 प्रतिशत रही." उन्होंने कहा, "आगामी त्योहारी सीजन से आवासीय मांग में और तेजी आने की उम्मीद है. इससे सितंबर तिमाही में देखने को मिली सकारात्मक गति को और मजबूती मिल सकती है."अल्फा कॉर्प डेवलपमेंट लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और सीएफओ संतोष अग्रवाल ने कहा कि लंबे समय तक ब्याज दरों में स्थिरता रहने के बाद RBI का रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ाने का फैसला ब्याज दरों में सावधानी से किए गए बदलाव का संकेत है. हालांकि, इससे लोन लेने की कॉस्ट और फाइनेंसिंग पर थोड़ा असर पड़ सकता है, लेकिन हमें नहीं लगता कि इसका रियल एस्टेट सेक्टर की मौजूदा रफ्तार पर कोई बड़ा असर पड़ेगा.

उन्होंने कहा कि घरों की मांग, खासकर प्रीमियम और मिड-टू-हाई-एंड सेगमेंट में, लोगों की बढ़ती आय, शहरीकरण और खरीदारों के मजबूत भरोसे की वजह से बनी हुई है. आने वाले समय में डेवलपर्स को फाइनेंसिंग लागत और खरीदारों के रुझान में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं, लेकिन सेक्टर की ग्रोथ को बढ़ावा देने वाले बुनियादी कारण अभी भी मजबूत हैं. अब फोकस मांग को बनाए रखने और बाजार में स्थिरता कायम रखने पर रहेगा.

M3M इंडिया के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और कॉर्पोरेट फाइनेंस हेड, प्रतीक टिबरेवाला ने कहा कि ग्लोबल अस्थिरता के बीच महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए RBI का रेपो रेट 25 bps बढ़ाकर 5.50% करना एक सोच-समझकर उठाया गया कदम है. भले ही कर्ज लेने की लागत थोड़ी बढ़ सकती है, लेकिन रुपये में लंबे समय तक स्थिरता रहने से ग्लोबल कैपिटल को आकर्षित करने में मदद मिलेगी और इससे रियल एस्टेट सेक्टर को फायदा होगा. प्रीमियम घरों और कमर्शियल प्रॉपर्टी की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है और इसकी वजह लोगों की बढ़ती संपत्ति और आय है.